मन नहीं थकता.

कुछ लोग दुनियाॅं में, शायद इसलिए आते ।

भला सबलोग का करते, बदले कुछ नहीं लेते।।

भला करने में लोगों को, उन्हें आनन्द है मिलता।

पड़ती झेलनी परेशानियाॅं , फिर भी मजा मिलता।।

सुकून उनके दिल को, इतना अधिक मिलता।

जिसे परेशानी कहते लोग,पर इनको मजा मिलता।।

जिन्हें कोई काम करने में, सुखद एहसास मिल जाये।

कठिनतम काम भी उनके लिये, आसान हो जाये ।।

थकान उनके पास तो, आही नहीं सकता कभी।

तन जाये थोड़ा थक भले, मन नहीं थकता कभी।।

ऐसे लोग गिनती में कभी, ज्यादा नहीं होते ।

काफी समय के बाद ये , अवतार हैं लेते।।

वैसे भी दुनियाॅं में , अच्छे लोग कम होते ।

आते निर्विकार मन ले,वह विकृत यहां होते।।

यह विकार ही शत्रु प्रबल है, प्रत्येक मानव का।

डुबोये बिन न जल्दी छोड़ता,यह शत्रु है सबका।।

विकार तो कमोवेश सब में, है रहा करता ।

बचकर अछूता रह गया,वह संत कहलाता ।।

जो संतगण होते , नमन के पात्र हैं होते ।

श्रद्धा लोग का इनपर , प्यार सबको ये करते।।

अपना पराया कुछ नहीं,उनको एक सब लगते

प्रकृति की सभी निर्माण है, सबों से प्रेम ये करते।।

बड़े ही धन्य हैं वे जो, बनाई प्यारी सी दुनियाॅं।

विविध चीजों से भरकर वे,सजा दी प्यारी यह दुनियाॅं।।