कौवा मोती खायेगा.

बदल रही है क्या दुनियाॅ , अपने कर्मों के फेर से।

जल्द नहीं सुनता अब कोई,सब सुनता अब देरसे।।

नहीं ढंग से बात करेगा, अपने मन का ही सभी करेगा।

समझाने से फर्क न पड़ता, नहीं बातपर गौड़ करेगा ।।

झुंझलायेगा , नहीं सुनेगा , हड़कत से परेशान करेगा।

माॅ-बाप को स्वयं डांटकर ,सिट्टी पिट्टी गुम करेगा ।।

पकड़ ऊंगली जोचलना सीखा,तर्जनी उसे दिखलायेग।

ऊॅची आवाज लगाकर उनको,अपनी बात बतायेगा ।।

मात-पिताअब दाई नौकर,बदतरउससे ब्यवहार करेगा

बात-बात पर कभी कभी,जमकर फटकार लगायेगा।।

नहीं करेगा कद्र बड़ों को,उनको मूर्ख बतायेगा ।

गुरुजनों को अपने सम्मुख,बिलकुल नहीं लगायेगा।।

भ्रष्टाचार का राज रहेगा, लोग भ्रष्ट हो जायेगा ।

सदाचारी बनकर बेचारा , कहीं छिपा रह पायेगा।।

सज्जनगण चुपचाप रहेगें , दूर्जन मौज मनायेगा।

मुण्ड गिनाने के इस युग में,ऊॅचा ओहदा पा जायेगा।।

ज्ञानी जनने ठीक कहा था,’एकदिन कलियुग आयेगा’।

हंस चुगेगा दाना, जमकर कौवा मोती खायेगा ।।

काला अक्षर भैस बराबर, मुख्यमंत्री तक बन जायेगा।

तेजपढ़ंका आई०ए०एस० बन,उनका चॅवर डोलायेगा।

बदल गयी क्या नहीं है दुनिया,बदल कहाॅतक जायेगी।

अनपढ़ गंवार चुन जायेगा,कौवा तो ही मोती खायेगा।।

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