करता क्यों अत्याचार.

क्यों करता अत्याचार, सदा अंजाम बुरा होता है।

जो बुरे कर्म करते उनका ,परिणाम बुरा होता है।।

कभी शीघ्र तो कभी देर से, पर होना निश्चित है ।

गणन सभी कर्मों का होना, भी समझें निश्चित है।।

न्याय सदा करती प्रकृति , विलम्ब भले होता है।

निश्चित विलम्ब होने के पीछे,मकसद कुछ होता है।।

‘गलत काम का गलत नतीजा’,लोग सत्य कहते हैं।

सजा उन्हें मिलती जाती, पर समझ नहीं पाते हैं।।

काम,क्रोध,मद,लोभ का चश्मा,आंखोंपर उनकी होती।

तुच्छ चीजभी उस चश्मेसे,उनको बहुत बड़ी दिखती।।

ये चार चोर घुस जिस दिलपर,अपना पैठ बना लेता।

भ्रष्टाचारी और अनाचारी,उतना ही उसै बना देता।।

जो कोई इन चोरों को, अपने बस में कर लेता ।

वह मानवता से ऊपर, महा मानव है बन जाता।।

मानव दिल तो स्वयं आपमें,शुद्ध रहा करता है ।

पर कचरों का प्रभाव उन्हें, प्रदूषित करता है ।।

अधिकांशलोग हैंफॅसे आज,उनकेही चक्करमें जमकर

भौतिकता में डूब रहे,आकण्ठ क्षणिक मस्ती लेकर।।

इस माया नगरी में अपना, कर्म भूल जाते हैं ।

भटक कर अपनी राहोंसे,विलग चले जाते हैं।।

कभी भटकने वालों को,गणतब्य नहीं मिलता है।

क्यों करता अत्याचार,सदा अंजाम बुरा होता है।।

अगर दुनियाॅ तुम्हीं बनाये हो.

खुदा ये सच है अगर, दुनियाॅ तुम्हीं बनाये हो ।

उनके हर एक कण में, रहते तुम्ही समाये हो ।।

फिर भी रहे क्यों गम हमे,दुनिया में दुनिया वालों।ं

रहते जब हर पलों में , बनकर हमारे साये हो ।।

क्या जरूरत ही हमें , अपना सर खपाने की ।

रहे जो साथ ही जब , हरदम हमारा पालक हो।।

करता क्यूॅ हूॅ भला , गम की हमें जरूरत ही क्या?

फिर भी नादान दिल को, बेवजह जलाते हो ??

तेरी मर्जी के बिना , कुछ भी तो नहीं होता जगमें ।

जो भी होता है यहाॅ , सब‌ कुछ तुम्हीं कराते हो ।।

हम तो नाचते पर , केवल तेरे इशारों पर ।

सूत्र तो हाथों तेरे , जो चाहते करात हो ।।

करूॅ मैं फिक्र क्यूॅ , कतयी नहीं जरूरत हो।

छत्र की छाॅवों में , सब को तुम्हीं बिठाये हो ।।