जो डूबता,पार वही होता.

जाने कौन कहाॅ से आकर, दिल में किया प्रवेश मेरा।

वातायन तो बंद पड़े थे, दरवाजे भी बंद पडा ।।

नहीं किसीने आते देखा , देखा कोई नहीं जाते।

उनकी इच्छा ,जब जी चाहें, रहते सदा ही आते जाते।।

जाने कैसे कौन चला, आता है बन्द दरवाजों से।

दिलमें घुंस जाता चुपके,कुछ कहता मंद आवाजों से।

मेरा मन भोला बेचारा, छल कपटों से दूर सदा ।

अति निर्मल ,कोमल अतिशय,रहते इनसे दूर सदा।।

इस पक्षी का नीड़ यही, बसेरा इसी महल में ।

जो खूब लगाते गोते इसमें, रहते मस्त मगन में।।

प्रेम की दरिया में जो डूबा , पार वही हो पाता ।

जो तैर निकल जाता दरिये से, डूब वही है जाता।।

यह नेह की दरिया सब में रहता, हर मानव के मनमे।

जो खूब लगाते गोते इसमें,रहते मस्त मगन में ।।

इस दरिया में सब कुछ रहता ,जो ढ़ूंढ़ो मिल जाता।

जिसको चाहो उसे पुकारो, दौड़ वही चल जाता ।।

कड़ियाॅ उसकी मजबूत बड़ी, कोई तोड़े टूट न पाता।

चाहे जितना जोड़ लगा दे,भंग नहीं कर पाता ।।

बंधन इसका मजबूत बहुत,लम्बाभी बहुत अधिक होता।

अगर बांधने वाला चाहे,ब्रह्माण्ड बाॅध यह सकता ।।

धन्य बनाया है जिससे ,नमन उन्हें मैं करता ।

उनके पावन चरणों पर , मस्तक नत मैं करता ।।

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