लगन.

लगन लगती किसी को जब, वही कुछ कर दिखाता है।

असम्भव जो लगा करता, कर सम्भव दिखाता है ।।

कहीं कछ भी असम्भव तो, दुनिया में नहीं होता।

जिसे कहते असम्भव हम ,वहम मन का वो है होता।।

लगन जिसमें लगी होती, कदम बढते चले जाते ।

असम्भव छोड़ पथ उनके,बगल में हो खड़े जाते।।

सफलता आ लगन के सामने,करबद्ध हो जाती।

लगनशील के चरणों में आ, नतमस्त हो जाती ।।

सफलता हर कदम चरण उनका, चूमती रहती।

कदम पड़ते जहां उनके , पांवड़े वह बिछा देती।।

लगन जिसमें लगी होती ,वही तो युग पुरुष बनता।

जमाना अनुशरण करता, कुशल नेतृत्व वह देता।।

कुशल नेतृत्व का मिलना, बड़ा संयोग है होता ।

नायक हर जगह और हर समय,पैदा नहीं होता।।

अलग कुछ शक्तियां लेकर, कहीं अवतार वह लेता ।

बिगड़ी ब्यवस्था को , नया एक मोड़ वह देता ।।

बड़ा संयोग होता है ,तो यह अवसर मिला करता।

नसीब ही हर लोग का, कब एक सा होता ।।

खल-गण नहीं आते नजर ,धरातल में चले जाते।

उनके विलक्षण रोशनी में, लुप्त हो जाते ।।

लगन हो खोजने की , वह कहीं से खोज ही लेते।

अदृश्य जो रहते , उसे भी द‌श्य कर लेते ।।

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