सच्चा मित्र मिल जाये.

कौन है अपना कौन पराया , यह तो मौके की बात है।

सबके सब मौका परस्त है,यह कलियुग का संताप है।।

पिता,पुत्रका प्रेम है पावन, दिल का उनका अनुराग है।

हठ कर मांगे,पुत्र पिता से ,ना कर पाता इन्कार है ।।

विवसता चाहे जोकरवा दे,बात विवसताकी कुछऔर।

अनिच्छा से भी करना पड़ता,दिल कुछ चाहे,करता कुछ और।।

मात-पिता के होते बच्चे,आंखो का उनके तारा ।

कुर्वाण सभी कुछ कर सकते,उनपर अपना तन,मन,धन सारा।।

समय गाढा एहसास कराता, हित अनहित की बातें।

अच्छे दिनमें सबलोग हैं मिलते,दुर्दिनमें नजरन आते।।

दुर्दिन मै काम जो है आते,सच्चा मित्र वही होते।

झूठे तो भाग खड़े होते,नजर तक उधर नहीं आते।।

रिश्ते नाते , बातें-वादे, होते सारे अवसरवादी।

जो दगाबाज होते अन्दरसे,करते बाहरसे चमचाबाजी।

जो गफलत में पड़ जाते,चंगुल में उनके फंस जाते।

ये दगाबाज सब लूट उसे,नंगा ही कर दम लेते।।

बिनखुदगर्जी, रिश्तेदारों को,देते जो है आयाम ।

बहुत लोग कम मिलते ऐसे, जग करता उन्हें सलाम।।

जो बहुत भाग्यशाली होते, उन्हें ऐसे लोग मिला करते।

शुक्रिया लोग उपर वाले को,जमकर उन्हें दिया करते।।

गिनती मेंये थोड़े होते,फिरभी मिल जाते कभी-कभी।

नवरत्न कहा मिलताहै हरदम,मिलपातातो कभी-कभी

मौकापरस्त इस दुनियां में,मित्र अगर सच्चा मिलजाये।

धन्यभाग्य वे हैं होते , अनमोल रत्न जो पा जायें ।।