मुक्तक

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16/11/2019

(१)

सूकर्म कठिन होता करने में ,कूकर्म बहुत आसान।

समय लेता निर्माण बहुत, बिध्वंस बड़ा आसान ।।

पेड़ लगा कर फल पाने में, कितना है ब्यवधान।

बड़े पेड़ को काट गिराना ,पल भर का है काम ।।

(०२)

चमक दौलत की इतनी होती ,देती आंखें चौंधियाये।

नशा बहुत होती है उसमें, मन को मस्त बनाये ।।

मस्ती सदा नचाती मन को ,सुध बुध भीखो जाये।

भले अच्छे इन्सान बुत ,पत्थर का बन जाये ।।

(०३)

प्यार की इतनी कीमत होती ,सारी दौलत सै ज्यादा।

जग की दौलत सब एक तरफ,फिर भी भारी ज्यादा।।

गर प्यार न होता दुनिया न होती,ना होता रस्मेंँ वादा।

जो प्यार का बंधन टूट जाये ,जग नहीं चलेगा ज्यादा।।

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