मुक्तक

१३/११/२०१९

जिन्हे पक्का इरादा हो ,सफलता भी वही पाते ।

बिना इसके सफल कोई, हरगिज नहीं होते ।।

उनका ठान लेता दिल , फिर विचलित नहीं होते।

बिना पूरा किये मकसद, दम तक नहीं लेते ।।

(ख)

जिन्हे पक्का इरादा हो , आसमां छू वही सकता ।

लगा गोते अथाह सागर , थाह भी सकता ।।

डरकर किनारे पर , बौरा बैठ जो जाता ।

बैठ सिर्फ हाथ है मलता ,हाथ पर कुछ नहीं लगता।।

(ग)

अटल जिनका इरादा हो , वही कुछ कर दिखाते हैं ।

असंभव को वही संभव , डट कर बनाते हैं ।।

जहां रखते कदम , रास्ता तो खुद-ब-खुद बनते।

स्वयं कठिनाइयां आकर , चरण इनका दबाते हैं।।

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