हर चीजें बदल जाती.

समय के साथ दुनियाँ की,हर चीजें बदल जाती ।
अछूता कुछ नहीं बचता, सब कुछ बदल जाती।।

कभी थे नयन का तारा, कभी काँटा वही बन गये।
अघाती थी न आँखें देखजिनको,अब किरकिरी बनगये।।

मिलनबिन चैन न मिलता जिन्हें था,अब नजरें चुराते हैं।
सदा जो संग थे चलते कभी, नजर से दूर रहते हैं ।।

सुकून मिलता था जिन्हें, गलबाहियों मे भर सदा ।
वही मुँह फेर कर बैठे , बने अनजान लगते हैं ।।

जिनको गुलबदन कहना भी ,लगता था कभी ओछा।
वही सूखे हुए पत्तों का , छोटा ढ़ेर लगते हैं ।।

नजर भर देख लेने को,तरशती थी कभी आँखे अनेकों।
वही आती कभी जब सामने,सब आँखें मूँद लेते हैं ।।

यह तो समय का है फेर,अन्यथा कुछ नहीं ज्यादा।
अकड तो आज भी सब में,नही क्यों समझ पाते हैं।।

बदल गयी सोंच लोगों की,भौतिकता हो गयी भारी ।
दौलत के पड़े पीछे , अकल सब की गई मारी ।।

नैतिकता रो रही होगी, कहीं बैठी अकेली ही ।
नहीं कोई,सान्तवना जो दे,न संग में कोई सहेली भी।।

कभी कोई युग-पुरुष होगा ,नैतिकता ला वही सकता।
ह्रास हुई मानसिकता को, फिर से उठा सकता ।।

हद से जब गुजर जाता, तो ऐसे लोग आते हैं ।
ब्यभिचार ,अत्याचार को , भिड़ कर भगाते हैं ।।

समय अब आ चुका नजदीक, फरिश्ता आयेगा कोई।
ब्यभिचार रूपी तम से लड़,, भगायेगा कोई ।।

रहो तैयार स्वागत के लिए , आ ही चुका है अब ।
उभर कर निकल आयेगा यहीं,वह पहुँच चुका है कब।।

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