पल जिन्दगी का,क्यों लुटा देते

अनमोल पल हम जिन्दगी का, क्यों लुटा देते?
समय बहुमूल्य है कितना,सबक हम क्यों नहीं लेते??

कभी इस रत्न को ,क्यों ब्यर्थ में बर्बाद कर देते।
हम बेवजह और बेतुकी, कुछ काम कर देते ।।

पथ से उतर बे-पथ ,बहक , हम चाल चल देते ।
क्यों बेवजह गरिमा को अपनी, स्वयं खो देते ।।

स्वयं की बर्बादियों को,तमाशायी बन क्यों देखते ?
रोकना तो दूर उसमें , आनन्द ही हम लूटते ।।

समय का मूल्य का पहचान ,जानें क्यों नहीं करते?
निकल कर दूर हो जाता तो,बैठे हाथ क्यो मलते ??

समय जो बीत जाता है, लौट वापस नहीं आता ।
जहाँ जो है ,वहीं पर छोड कर,आगे निकल जाता।

कर ले लाख कोशिश कोई,न इसको रोक है पाता।
कोई बाँधना चाहे अगर , पर बाँध न पाता ।।

समय जो ब्यर्थ खो देते, नहीं उपभोग हैं करते ।
बाद मे हाथ मलने के सिवा ,उनसे कुछ नहीं होते ।।

महान लोगों का जरा , इतिहास तो पढ़ लें ।
समय का मूल्य को समझा उन्होंने, गौर तो कर लें।।

नहीं जो ब्यर्थ खोते है समय,कुछ कर दिखाते हैं ।
मानव जिन्दगी पाने का मकसद, वे समझते हैं ।।

बचा जो है समय अब भी , उसे सत्कर्म में डालें।
मनुज होने का अपना फर्ज ,दुनियाँ को चुका डालें।।

जगत से जो लिया कुछ कर्ज,तो उसको चुका डालें।
अगर कुछ दे के जा सकते ,तो निश्चित ही दे डालें।।