रिश्ते निभाना कठिन होता .

रिश्ते जोड़ना आसान ,निभाना पर कठिन होता ।
पौधे रोप तो देते , पर रक्षण कठिन होता ।।

रिश्ता जोड़नेवाला , तो रिश्ता जोड देता है ।
निभाना जिम्मेदारी को , परस्पर काम होता है ।।

बहुत नाजुक हुआ करता, बहुत निर्मल ये होता है।
इसे सम्हालना आसान नहीं, संवेदनशील होता है ।।

ऐसा सब नहीं होता, कुछ मजवूत होता है ।
इसे चाहे अगर कोई तोड़ना,,,तो टुट न पाता है ।।

अगर तुफान भी शक का, कभी बेजोर आता है।
अपनी पूरी ताकत भी लगाकर, हार जाता है ।।

जडें मजबूत इतना, हारना तुफान को पडता।
अपनी शक्ति का गुमान ,उनको छोड़ना पडता ।।

ताकतवर हुआ करते ,जो रखते प्रेम आपस में ।
कमजोर से बलवान बनते ,मिलकर वे के आपस में।।

मुश्किल तोड़ना फिर तो ,दुश्मन हार जाता है ।
असक जिसको समझते अब ,लोहा मान जाता है।।

यों तो खून का रिश्ता , बडा मजवूत होता है ।
बन्थन है बडा तगडा , पर यह अंथ होता है ।।

अच्छा बुरा का ज्ञान तो , इनको नहीं होता ।
नजर आता नहीं इसको ,अंध बिश्वास है होता ।।

पर विचार का रिश्ता, बडा मजबूत है होता ।
आँखें खोल कर रखता , अंधा नहीं होता ।।

दोनों देखता है ,सोंचता , बिचार है करता ।
गलत बढ़ते कदम को थाम ,सही सुझाव है देता।।

ये रिश्ता टूटता जल्दी नहीं, मजबूत है होता ।
सच्चाई और सन्मार्ग का , ये पथिक है होता।।