मधुमास न जाने पाये

संग में लेकर रंग-गुलाल की, बारिश कहाँ से आयी है ।
यह बासन्ती छटा कहाँ से , ले धरती पर आई है ??

जिधर देखिये ,रंग -बिरंगे , पुष्प मही पर छायी है ।
भंवरों की गुंजन मधुर, वाटिका में कैसे भर आयी है??

कोयल की कूक से बाग बगीचा, में मस्ती भर आई है।
मंजर बागों के पेडो से , मधुर मादकता छायी है ।।

स्वर्गलोक की पुष्प वाटिका , क्या धरती पर आई है?
जानें जिज्ञासा क्या ले इस, कर्म -भूमि पर आई है ।।

जिधर देखिये पुष्प दिखेगें , सुन्दरता हर ओर दिखेगी।
मन मोहक रंगों गंधों से , भरी सी चमन बहार दिखेगी।।

जीवन की इस बगिया में , खुशियाँ सदा बेअंत रहे ।
प्रफुल्लित रहे जन जीवन सारे, छाया सदा बसंत रहे ।।

बना रहे यह मौसम हरदम , फूलों से जीवन सजा रहे।
मधुमास न जाये हमें त्याग, मधुपों का गुंजन सदा रहे ।।

ऐ बनमाली ,जगत नियंता , ध्यान सदा देते रहना ।
हटे न सिर से तेरी साया , कृपा सदा करते रहना ।।

“बसंत नहीं आता ” कहते हैं , “ले आया जाता है ” ।
मन में बसंत की खुशियाँ सारी, बसा लिया जाता है।।

सारे उमंग को अपनें दिल में , प्रेमपूर्ण बसा लें ।
नहीं बसंत जा पायेगा , ऐसी एक समाँ बना लें ।।

यह गुलदस्ता फूलों का , ले कर बासन्ती आई है ।
सौगात लिये मधुमास धरा पर,मस्ती बन कर छायी है।।

2 विचार “मधुमास न जाने पाये&rdquo पर;

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