पेड़

प्रत्यक्ष व परोक्ष रूप से ,जग को जो जीवन देता । प्रकृति – प्रदत्त उपहार इसे , पेड़ नाम सब है देता ।।

हरा भरा, सब का मनभावन , शीतल छाया ,फल देता । जीवन को अहम प्राण-वायु ,सारे जग को निर्मल देता ।।

आसमान में छाये बादल, आकर्षित तुम से होता । आ कर बरसाता है रिमझिम ,टिपटिप  बूंदें जल देता।।

ऐ पेड़ तुम्हारी अहम भूमिका ,  हर एक जीवन में होता । गर रहे नहीं तुम, नहीं कल्पना जीवन का धरती पर होता॥

फरामोश एहसान है मानव, ये भी नहीं समझ पाता। निर्ममता से इसे काट , स्वार्थ सिद्धि है करता॥

परोपकार में कमी नहीं कभी,फिर भी पेड़ है करता। जो जीवन हरता इसका , उस पर भी सदा दया करता।।

परोपकार का कद्र कभी पर, मानव-मूढ़ नहीं करता । तुच्छ स्वार्थ में पड़ मानव ,  पेड़ों पर जुल्म  सदा  करता ॥

देर बहुत हो गयी , अगर हम अब भी नहीं जगेंगे। जल्द ही ऐसा होगा , जब ये पेड़ साथ नहीं होंगे॥

पेड़ हमारे मित्र अनोखे ,  हरे-भरे जब इसे रखेंगे। हरा-भरा ये जग होंगा , जीवन तब फलेंगे-फूलेंगे॥

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