गजल

नाराजगी भी क्यों भला ,अजी कुछ तो बोलियै ।
कुछ पल रुके, खामोश -से , और चल दिये ।।

माना खता हुई अगर,  तो माफ कीजिए ।
या, सामने  ही हूँ खड़ा, सजा दीजिये ।।

न तोड़ियै मरोड़ कर ,नाजुक बड़ा है दिल ।
चुपचाप बन के बेरहम , मसल ही दीजिये ।।

गिला नहीं होगी मुझे , कुछ आप से सनम ।
हो बेरहम, सितम करें , दया न कीजिये ।।

रूह भी जाये निकल , ये तन को छोड़ कर ।
देगी दुआ ये आप को , यकीन कीजिए ।।

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