मेघा बरसे

घनन-घनन घन मेघा बरसे, पिया मिलन को जियरा तरसे.

भींगे चुनरिया तन-मन भीगे ,यौवन-मन मन ही मन हरसे..

चमके बिजुरिया रह रह कर के, थम-थम कर के मेघा गरजे.

दामिनी-दमक नभ में फैले, तम को ज्योतिर्मय कर दे..

अंधकार साम्राज्य बना कर, अपना ही सिक्का चलवा दे.

दिवा बना चुपचाप बेचारा, आत्म समर्पण कर के..

सुध-बुध खो कर, बेसुध हो कर, प्रिया न धीरज ही खो दे.

पागल मनवॉं विरह अग्नि में, कुछ अनहोनी ही कर दे..

कभी पवन के झोके आ कर ,दरवाजा खट -खट कर दे.

दौड़े आती दरवाजे तक ,अपनी सुध- बुध को खो दे..

बहुत जलन होती है दिल में ,जिसे बारिश नहीं बुझा पाये..

जलन स्वयं बुझ जाये जब , साजन अपना घर आ जाये..

थम जाओ ऐ मेघा प्यारे, क्यों इतनी आफत बरपाये.

फिर चाहो जितना बरसो, साजन तो घर आ जाये..

‘नापाक’ पाक

रूह वो गुमसुम रोता होगा, देकर ‘पाक’, तुम्हें यह नाम।

देख-देख क्या कहता होगा, तेरा सारा उल्टा काम॥

पाक नहीं, नापाक कहूँ, अनुरूप काम, तेरा होगा नाम।

‘पाक’ शब्द भी रोता होगा, तूने कर रखा बदनाम॥

नापाक इरादे हो रखते, नापाक काम सब करते हो।

आतंकवाद की फसल उगा, हिंसा फैलाते रहते हो॥

शांति-सद्भाव की फिक्र नहीं, बस ओछी हरकत करते हो।

आतंकी की फौज बना, इंसानियत से लड़ते हो॥

तुम द्वेष पड़ोसी से रखते, अपनी जनता को भरमाते।

भारत को अपना शत्रु बता, अपने अवाम को भड़काते॥

इतिहास देख लो, तुम भारत के सम्मुख कब टिक पाये हो।

जब भी तूने जंग लड़ी, भारत से मुँह की खाये हो॥

प्रगतिशील है देश हमारा, विकसित होता जाता है।

पहले विकसित कुछ देशों को, जरा नहीं भाता है॥

धन-बल देकर मूढ़ पाक को, हमसे सदा लड़ाता है।

इस मकसद से सदा पाक पर, दौलत खूब लुटाता है॥

सत्तालोलुप नेतृत्व पाक का, बात समझ सब पाता है।

अपनी ताज बचाने को पर, हमसे भिड़ जाता है॥

नामुराद है पाक, पुनः उसे धूल चटानी होगी।

समझाये न बात बने जब, उंगली टेढ़ी करनी होगी॥