क्यों उदास रहते हो

बता, ए नादां दिल, क्यों उदास रहते हो।
तुम तो चंचल हो, फिर क्यों हताश रहते हो॥
तुम तो स्थिर नहीं रहते, यही ख्याति है तेरी।
क्यों अपनी ख्याति का, उपहास किये देते हो॥
करो जो ठीक लगे, सोच लो बस, धीरज से।
करो कबूल तुम वही, तुम्हें जो भाता हो॥
तुम तो पावन हो, निर्मल हो, निष्कलंक बड़े।
पर किसी मोह से, मोहित तो कभी होते हो॥
त्याग दो काम-क्रोध, छोड़ दे तू लोभ-मद को।
है पथ दुरूह, पर, मुमकिन तू ही कर सकते हो॥
यही हैं दोष, डुबोती, जो हैं मानव को सदा।
फिर भी सब जान, क्यों अनजान बने दिखते हो॥
हो एक खजाना तू, भरे हो बल-विवेक से तुम।
क्यों न इस शक्ति को, सत्कर्म में लगाते हो॥ बता, ए नादां दिल….

चलो रे मन, कलह जहाँ ना होय

चलो रे मन, कलह जहाँ ना होय.

इस दुनियॉं में सभी दुखी हैं, नहीं चैन से कोय.
लोभ-क्रोध में सभी मगन हैं, दुखी यहाँ हर कोय.. चलो रे मन, कलह जहाँ ना होय.

हिंसा को रहते हैं आतुर, दया-धर्म से दूर.
छीना-झपटी में मशगूल, व्याकुल, बन बैठे हैं क्रूर.. चलो रे मन, कलह जहाँ ना होय.

दिल में सब के प्रेम भरा हो, घृणा जहॉं ना होय.
पर पीड़ा से दुखी हो मनवा, प्रेम-प्रेम ही होय.. चलो रे मन, कलह जहाँ ना होय.

बड़े-बड़े ज्ञानी-मुनी आए, दिये प्रेम संदेश.
बुद्ध, महावीर जैन और गांधी, का यह अद्भुत देश.. चलो रे मन, कलह जहाँ ना होय.

महाविभूतियों के जीवन से, मिले यही संदेश.
प्रेम-शांति के पथ पर चल मन, मिट जाएँगे क्लेश.. चलो रे मन, कलह जहाँ ना होय.

जन-जन मन में प्रेम जगा हो, घृणा रहे नहीं शेष.
हर मन में उल्लास भरा हो, ऐसा हो मेरा देश.. चलो रे मन, कलह जहाँ ना होय.