किसे पेश करूँ

अरमॉं को, करीनें से सजा कर, किसे पेश करूँ.
बहुत ही नाजुक है, ये नाजुक, किसे पेश करूँ..
खोजता हूँ मै सदा, दर-दर, ठोकरें खा कर.
कहॉं नसीब मेरा, तेरा जो दीदार करूँ..
नजर तूँ आती सदा, हर वक्त, पर दूर कहीं.
सदा परेशां हूँ, कहाँ, कैसे तेरा दीदार करूँ..
क्यूँ न बन्द कर लूँ पलकें, बसा के दिल में तुझे.
न कोई राह बचे, क्यूँ न राह हर अवरूद्ध करूँ..
करे कोई लाख यतन, निकालने को दिल से तुझे.
निकल न पाओगी, इस बात को आश्वस्त करूँ..
न हो निराश तनिक, ऐ मेरे अरमाँ, दिल के.
पूरे होकर रहेंगे, इस बात का ऐलान करूँ..
अरमॉं को, करीने से सजा कर, किसे पेश करूँ.
बहुत ही नाजुक है, ये नाजुक, किसे पेश करूँ..