जमीं पे जब भी मुझे, तूने उतारा होगा

जमीं पे जब भी मुझे, तूने उतारा होगा.
कोई मकसद भी तेरा, रहा ही रहा होगा..
ढूढता हूँ भी कभी, दिल के हर कोने मे.
कहीं छुपा के उसे,रखा ही रखा होगा..
बताते क्यों हो नही, बता, ए ऊपर वाले.
न बताने का भी कोई, राज़ ही रहा होगा..
दिया उतार तू, अनजान इस जहॉं मे मुझे.
कोई अपना भी नही, बताये क्या करना होगा..
मुझे है डर भी कहीं, जो न तू बतायेगा.
भटक जो जाऊँं अगर, इल्जाम पर तेरा होगा..
तूने बस भेज दिया, और कुछ बताया भी नही.
किससे है मिलना मुझे, काम भी बताना होगा..
न जो बताओगे तो,  दोष, बस तेरा होगा.
हो अच्छा या बुरा, जो भी, सब तेरा होगा..
देख मै छोड़ता हूँ,सब के सब, तेरे ऊपर
खता भी होगी अगर, सब के सब तेरा होगा..
जमीं पे जब भी …….