वक्त होता है.

गंभीर बातें भी असक का, कौन है सुनता ?

सामर्थ्यवान का बकवास भी ,सबलोग है सुनता।।

यह सब तमाशा देखने को, नित्य है मिलता ।

सूपर-स्टार कल का आज ,’नवरत्न’ तेल बेंचता ।।

विडंबना किसका कहें,समझ में भी नहीं आता ।

वक्त की चोट सहना , हरलोग को पड़ता ।।

सदा ही सोंच कर चलिये, कल को कौन है देखा।

आज गर दे रहे धोखा,तो सकते खा भी कल धोखा।।

शुरु कोई काम करने के , कबल खुद सोंच लीजिए।

भला बुरा हर दृष्टि से , कर गौड़ लीजिए ।।

बनने का बिगड़ने का , कहते वक्त होता है ।

जब यह साथ दे, मिट्टी बदल कर स्वर्ण बनता है।।

समय कब क्या बना देता किसे,कोई कह नहीं सकता ।

परम जो मित्र होता आज का , कल शत्रु बन जाता ।।

कहते लोग शायद इसलिए,आदमी आदमी होता।

हिन्दू रहे या मुसलमान, यह तो बाद में बनता ।।

वक्त ऐसा आये जब, समप्रदाय ही मिट जाये सब।

बस आदमी ही आया था, आदमी रह जाये सब।।

आदमी को बांटकर,जो कर दिया बर्बाद उनको।

कोई मसीहा आये ,आकर आदमी कर दे सबों को।।

चैन से सब फिर रहेगा , बस आदमी पहचान होगा।

सम्प्रदाय तो मिट जायेंगे ,बस आदमी ही नाम होगा।।